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अज्ञान रूपी तम अज्ञानरुपी तम उपभोग धर्म अधर्म दया है मूल स्वर्णिम प्रभात नरकमेंलेजाताहैअंहकारकाद्वार।जीतसकोतोजीतलोसंस्कारसेसंसार। कृतज्ञता भाव दिन-रात पाकरतुम्हारेप्यारकासागरतनभूलीअपनामनभूली।सुधियोंकाअपनापनभूली सतत् बदलती आसुरी शक्तियां धर्म अविरामयुद्ध नियोजित नई शुरुआत दो-दो हाथ शांति का नाश भारतीय परंपरानुसार नेक बनेंगे संघर्षहीजीवनकासारबाकीसबमिथ्याव्याभिचार।

Hindi अधर्म का गहन तम Quotes